बुधवार, मार्च 22, 2023

मौलिक कर्तव्य – 11 fundamental duties in Hindi

मौलिक कर्तव्य क्या है? Fundamental duties in Hindi

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किसी भी काम को करने के दायित्व को कर्तव्य कहा जाता है। मौलिक कर्तव्य ऐसे आधारभूत कर्तव्य होते हैं जिनको देश व समाज की उन्नति और प्रगति तथा हर व्यक्ति की प्रगति व विकास के लिए किया जाना चाहिए। सरल शब्दों में कहें तो मनुष्य के नैतिक दायित्वों को हम मौलिक कर्तव्य कह सकते हैं।

मौलिक कर्तव्य, नैतिक दायित्वों का एक समूह होता हैं, जिनका पालन करने से एक अच्छे समाज की स्थापना की जा सकती है।  मौलिक-कर्तव्य, समाज में परतिवर्तन की कुंजी की तरह होते हैं।

इसी दिशा में आगे बढ्ने के लिए भारतवर्ष में भी सन्न 1976 में 42 वें संविधान संसोधन के द्वारा 10 मौलिक कर्तव्यों को संविधान में जोड़ा गया, जिनमें सन्न 2002 में 86 वें संविधान संसोधन के द्वारा 1 और मौलिक-कर्तव्य को जोड़ा गया। भारत देश में सामाजीक परिवर्तन, उन्नति, प्रगति व विकास के लिए वर्तमान में 11 मौलिक कर्तव्य हैं, जिनके विषय में संक्षिप्त में इस लेख में नीचे उल्लेख मिलेगा।

11 मौलिक कर्तव्य कौन-कौन से हैं? 11Fundamental duties

वर्तमान में भारतीय संविधान में अनुच्छेद 51 (क), भाग 4 (क) में निम्नलिखित 11 मौलिक कर्तव्य शामिल हैं:-

  1. हर एक नागरिक का यह कर्तव्य है की वह संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का आदर करें।
  2. राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरणा देने वाले उच्च आदर्शों को अपने हृदय में संजोए और उनका पालन करें।
  3. भारत की संप्रभुता, अखंडता और एकता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण रखें।
  4. देश की रक्षा करें और आह्वान करने पर देश की सेवा करें।
  5. भारत के सभी नागरिकों में समरसता और सम्मान भातृत्व की भावना का निर्माण करें, जो भाषा, धर्म और वर्ग या प्रदेश पर आधारित सब प्रकार के भेदभाव से परे हो और ऐसी प्रथाओं व रीतियों का त्याग करें जो महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध हैं।
  6. अपनी सामाजिक संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं का महत्व समझें और उसका निर्माण करें।
  7. अपने प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करें उसका संवर्धन करें और प्राणी मात्र के लिए दया की भावना रखें।
  8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ज्ञानार्जन और मानववाद के सुधार की भावना का विकास करें।
  9. देश की सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूरी बनाए रखें।
  10. सामूहिक एवं व्यक्तिगत गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट की तरफ बढ़ने का सतत प्रयास करें।
  11. 6 से 14 साल के बच्चों को उनके माता-पिता या फिर संरक्षक द्वारा प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना। (86 वें संविधान संसोधन अधिनियम, 2002 के तहत शामिल किया गया)

मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य में अंतर

आधारमौलिक कर्तव्यमौलिक अधिकार
संविधान में मौजूदयह संविधान के भाग IV (क) में मौजूद हैं।यह संविधान के भाग III में मौजूद हैं।
परिभाषायह देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर एक नागरिक का देश के लिए नैतिक दायित्व है।हर एक नागरिक के लिए उपलब्ध हैं, चाहे वह कोई भी धर्म, जाति, पंथ, लिंग या जन्म स्थान का हो।
कहाँ से लिया गयाइनकी अवधारणा को पूर्व सोवियत संघ के संविधान से लिया गया है।इनकी अवधारणा को संयुक्त राज्य अमेरिका से लिया गया है।
संविधान का अनुच्छेदअनुच्छेद 51 (A)अनुच्छेद 12 से 35
संविधान में कब शामिल किया गयासन्न 1976 में 42 वें संविधान संसोधन अधिनियम के तहत संविधान निर्माण के समय से ही संविधान में सम्मिलित थे।
किसके लिए उपलब्धयह सिर्फ नागरिकों के लिए ही उपलब्ध है।यह नागरिकों के साथ साथ कुछ विदेशियों के लिए भी उपलब्ध है।
कानून के समक्ष योग्यतायह कानून के समक्ष लागू करने योग्य के योग्य नहीं हैं।यह कानून के समक्ष लागू करने के योग्य हैं।
प्रकृतिइसकी प्रकृति सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक है।इसकी प्रकृति सामाजिक और राजनीतिक है।
प्रवर्तन की योग्यताइनको प्रत्यक्ष रूप से न्यायालयों द्वारा लागू करने का कोई प्रावधान संविधान में नहीं है। उपयुक्त कानून के द्वारा संसद इन्हे लागू कर सकती है। अर्थात यह न्यायालय द्वारा परिवर्तनीय नहीं हैं।इनको प्रत्यक्ष रूप से लागू किया जा सकता है। अर्थात यह न्यायालय द्वारा परिवर्तनीय हैं।
आधारजवाबदेही पर आधारित हैं।दिये गए विशेषाधिकारों पर आधारित हैं।
वादयोग्यतायह गैर न्यायोचित (Non Justiciable) होते हैं।यह वादयोग्य (Justiciable) हैं।
उल्लंघन पर सजा का प्रावधानइनका उल्लंघन करने पर सजा का कोई प्रावधान नहीं है।इंका उल्लंघन करने पर संविधान में सजा का प्रावधान किया गया है।
निलंबनीयतामौलिक कर्तव्यों को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं कर सकते हैं। इसलिए इनको अनिलंबनीय भी कहते हैं।आपातकाल की स्थिति में अनुच्छेद 20 व 21 को छोडकर राष्ट्रपति सब मौलिक अधिकारों को निलंबित कर सकते हैं। इसलिए मौलिक अधिकारों को हम निलंबनीय कहते हैं।
विषयवसतुमौलिक-कर्तव्यों की विषयवस्तु बहुत संक्षिप्त और छोटा है।मौलिक अधिकारों का विषयवस्तु अत्यंत विस्तृत है।
पालन करने के लिए कोन सा बलमौलिक कर्तव्यों के पालन के लिए नैतिक बल कार्य करता है।मौलिक अधिकारों के पालन के लिए कानूनी बल कार्य करता है।

किस देश के संविधान से मौलिक कर्तव्य लिया गया है?

दरअसल पूर्व सोवियत संघ के अलावा और किसी भी देश के संविधान में मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख नहीं मिलता है। भारत में संविधान निर्माण के समय संविधान निर्माताओं ने मौलिक-कर्तव्यों को संविधान में शामिल नहीं किया था। भारत में मौलिक-कर्तव्यों को 1976 में संविधान में जोड़ने से पहले सिर्फ पूर्व सोवियत संघ के संविधान में ही मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख मिलता है। इसलिए हम कह सकते हैं की भारतीय संविधान में मौलिक-कर्तव्यों को पूर्व सोवियत संघ के संविधान से लिया गया है।

मौलिक कर्तव्य कितने हैं?

सन्न 1976 के 42 वें संविधान संसोधन अधिनियम द्वारा 10 मौलिक अधिकारों को जोड़ा गया था लेकिन बाद में 86 वें संविधान संसोधन अधिनियम, 2002 के द्वारा 1 और कर्तव्य को जोड़ा गया, जिसको मिलाकर कुल 11 मौलिक कर्तव्य भारतीय संविधान में सम्मिलित हैं।

संविधान के किस संशोधन में मौलिक कर्तव्यों को जोड़ा

भारत के संविधान में मौलिक कर्तव्यों को संविधान निर्माण के समय नहीं शामिल किया गया था। लेकिन बाद में आंतरिक आपातकाल के दौरान (1975-1977) मौलिक-कर्तव्यों की जरूरत को महसूस किया गया। मौलिक-कर्तव्यों को संविधान में जोड़ने के लिए एक समिति का गठित किया गया जिसकी अध्यक्षता सरदार स्वर्ण सिंह द्वारा की गई। सरदार स्वर्ण सिंह समिति द्वारा सिफ़ारिश की गई की भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को जोड़ने के लिए इनको एक अलग अध्याय के रूप में जोड़ना चाहिए।

सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफ़ारिशों को आधार मानकर सन्न 1976 में 42 वें संविधान संसोधन अधिनियम के द्वारा संविधान में भाग IV A को संविधान में जोड़ा गया जो की मौलिक कर्तव्यों से संबन्धित था। शुरुआत में अनुछेद संख्या 51 (A) के तहत संविधान में 10 मौलिक कर्तव्यों को जोड़ा गया था। लेकिन बाद में सन्न 2002 में 86 वें संविधान संसोधन अधिनियम द्वारा एक और मौलिक-कर्तव्य को इस सूची में जोड़ा गया। वर्तमान में भारतीय संविधान में मौलिक-कर्तव्यों की संख्या 11 हो गई है।

मौलिक कर्तव्य pdf

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