शनिवार, सितम्बर 23, 2023

नीली क्रांति क्या है? – जनक, उद्देश्य और परिणाम

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नीली क्रांति को जलीय कृषि के बढ़ावे के लिए शुरू किया गया था, जैसे तालाब में मत्स्य पालन, मत्स्य पालन के छोटे उद्योगों को बढ़ावा, समुद्री उत्पादों को बढ़ाना आदि। नीली क्रांति का सीधा संबंध मत्स्य पालन उद्योग और उसके विकास से है।

इसमें हम जानेंगे की नीली क्रांति क्या है, इसके क्या उद्देश्य और क्या परिणाम है और इससे संबंधित अन्य जानकारियां भी आपको यहां पर मिलेगी। आज के समय में भारत देश में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय नीली क्रांति के उद्देश्यों का प्रबंधन करता है।

Note: नीली क्रांति को नील क्रांति थी कहा जाता है।

नीली क्रांति क्या है?

क्रांति क्या है nili kranti kya hai

जलीय कृषि उद्योग को बढ़ाने के लिए भारत सरकार द्वारा सन 1985 से 1990 सातवीं पंचवर्षीय योजना एक पहल की गई जिससे नीली क्रांति के नाम से जाना गया। सबसे पहले इसकी शुरुआत चीन देश में हुई थी क्योंकि जलीय कृषि उत्पादन में चीन का हिस्सा पूरे विश्व का दो तिहाई है।

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आज के समय में मत्स्य पालन का एकीकृत विकास और प्रबंधन पहल के तहत मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय नीली क्रांति के उद्देश्यों का प्रबंधन करता है। इसका मुख्य उद्देश्य जलीय कृषि को बढ़ाना है और इसके साथ जैव सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी चिंताओं को भी ध्यान में रखते हुए नीली क्रांति के उद्देश्यों को पूर्ण करना है।

भारत में नील क्रांति के जनक डॉ हीरालाल चौधरी हैं, जो एक बंगाल के मत्स्य वैज्ञानिक थे।

पढ़ें: हरित क्रांति क्या है? जनक, लक्ष्य, उद्देश्य और परिणाम

भारत में नीली क्रांति

भारत में नीली क्रांति की शुरुआत सातवें पंचवर्षीय योजना में सन 1985 से 1920 के दौरान हुई थी और आठवीं पंचवर्षीय योजना जो 1992 से 1997 के दौरान समुद्री मछली पालन कार्यक्रम को शुरू किया गया।

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भारत में कृषि और विकास कल्याण मंत्रालय ने बक्सर पालन, डेरी और पशुपालन विभाग के साथ मिलकर इन सभी का पुनर्गठन करने की योजना बनाई है ताकि नील क्रांति को एक छतरी के नीचे रखकर इस योजना से लाभ उठाया जा सके। यह योजना मत्स्य पालन के विकास और प्रबंधन पर केंद्रित है जिसे राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

नीली क्रांति के घटक:

  • मत्स्य पालन क्षेत्र की व्यवस्था
  • राष्ट्रीय मत्स्य पालन विकास बोर्ड और इससे संबंधित गतिविधियां
  • देश में मत्स्य पालन और जलीय कृषि का विकास
  • मछुआरों के कल्याण के लिए राष्ट्रीय योजना
  • समुद्री मछली पालन, फसल कटाई और बुनियादी ढांचे का विकास और उनका संचालन
  • निगरानी, नियंत्रण और अलग जरूरतों के लिए आधारित हस्तक्षेप
  • मछली पालन क्षेत्र की भौगोलिक सूचना प्रणाली और डेटाबेस को मजबूत करना

नीली क्रांति के उद्देश्य

जैसा कि आप ऊपर दी गई जानकारी से नीली क्रांति के उद्देश्य को समझ गए होंगे, कि नीली क्रांति का उद्देश्य मछली पालन को बढ़ावा देना। इसके साथ-साथ नीली क्रांति के उद्देश्य में खाद्य और पोषण सुरक्षा का योगदान भी शामिल है परंतु इन उद्देश्यों के प्रमुख घटक और कुछ महत्वपूर्ण उद्देश्य नीचे दिए गए हैं।

  • भारत देश मछली पालन को बढ़ावा देना और अधिक से अधिक मत्स्य पालन करके उनकी पैदावार बनाना।
  • भारतीय समुद्री क्षेत्र में कुल मछली क्षमता का पूरी तरह से दोहन करना और उनके उत्पादन को कई गुना बढ़ाना।
  • मछली पालन को प्रौद्योगिकी और प्रक्रियाओं की मदद से आधुनिक और तेजी से बढ़ते हुए उद्योगों में बदलना।
  • मछुआरों की कमाई को दुगना करना और आधुनिक प्रक्रियाओं द्वारा बुनियादी ढांचे में सुधार करना।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पोषण का विकास
  • मछली के निर्यात को कई गुना बढ़ाना और उनसे होने वाले लाभों पर ध्यान देना।
  • मछली पालने वालों और मछुआरों की आय वृद्धि में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।

नीली क्रांति का परिणाम

नील क्रांति के कारण मछली प्रजनन की नई तकनीक में विकास हुआ है और उसके साथ साथ इनके पालन, विपणन और निर्यात में सुधार आया है। मछली किसान विकास एजेंसी (एफएफडीए) ने मत्स्य पालन क्षेत्र में सुधार करके अच्छे परिणाम हासिल किए हैं।

  • वर्तमान में भारत देश में मछली पालन क्षेत्र बहुत तेजी से बढ़ा है और मछली उत्पादन कई मिलियन टन पहुंचा है।
  • भारत में नील क्रांति के परिणाम स्वरूप आज के समय में भारत देश दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। और यदि इसी प्रकार से मछली उत्पादन में वृद्धि होती है तो जल्दी ही विश्व का पहला सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश होगा।
  • मछली पालन में भारत की जीडीपी में 1% का योगदान दिया है, वहीं कृषि जीडीपी में मछली पालन और जलीय कृषि उत्पादन का योगदान 5% है।
  • यदि कृषि निर्यात की बात की जाए तो मछली पालन उत्पाद भारत का सबसे बड़ा कृषि निर्यात बन गया है।
  • पिछले कुछ वर्षों में मछली उत्पादों की पैदावार में वैश्विक औसत प्रतिशत था से दुगनी औसत वार्षिक वृद्धि भारत में दर्ज की गई है।

नीली क्रांति से संबंधित चुनौतियां

  • कुल मछली पालन क्षमता के बहुत छोटे भाग का ही दोहन अभी भारत करने में सक्षम है। जिसे और अधिक तेजी से बढ़ाना चाहिए ताकि जल्द से जल्द उपलब्ध मछली पालन क्षमता के बहुत बड़े भाग का दो किया जा सके।
  • मछली पालन के लिए भारत में मीठे पानी के स्त्रोत का केवल 40% और खारे जल स्त्रोत का केवल 15% का ही उपयोग होता है जिसे बढ़ाया जाना चाहिए।
  • आज के आधुनिक ताप के कारण हानिकारक पदार्थ जैसे प्लास्टिक और अन्य रसायन जल स्त्रोतों में डाले जाते हैं जिनसे जलीय जीवन का विनाश होता है और इसे रोक पाना एक चुनौती बन गया है।
  • आधुनिक तरीके से मछली पालन और उत्पादन ओ को बहुत तेजी से बढ़ाया जाता है और उनका दोहन भी बहुत तेजी से हो रहा है जिससे समुद्री जीवन और जनजीवन काफी तेजी से प्रभावित होता है।

नीली क्रांति से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां

  • नीली क्रांति की शुरुआत चीन देश में हुई थी और यह समय 1960 के दशक का था जिसके बाद से ही पूरा विश्व तेजी से मछली पालन जैसे उद्योग को बढ़ा रहा है।
  • भारत में नीली क्रांति की शुरुआत सातवीं पंचवर्षीय योजना वर्ष 1985 से 1990 के बीच हुई थी। का प्रयोजन हुआ था।
  • सातवीं पंचवर्षीय योजना के बाद आठवीं पंचवर्षीय योजना वर्ष 1992 से 1997 के दौरान सघन मरीन फिशरीज प्रोग्राम को शुरू किया गया।
  • भारत में फिशिंग बंदरगाह स्थापित किए गए जो तूतीकोरिन, पोरबंदर, विशाखापट्टनम, पोर्ट ब्लेयर और कोच्चि है।
  • मछली की प्रजातियां का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ इनमें सुधार के लिए भी अनुसंधान केंद्र स्थापित किए गए हैं।

नील क्रांति प्रश्नोत्तरी

भारत में नीली क्रांति की शुरुआत कब हुई?

भारत में नीली क्रांति की शुरुआत सातवीं पंचवर्षीय योजना वर्ष 1985 से 1990 के बीच हुई थी।

भारत में नीली क्रांति के जनक कौन हैं?

डॉ हीरालाल चौधरी को नीली क्रांति का जनक माना जाता है। वह एक बंगाली से वैज्ञानिक थे।

सबसे पहले नीली क्रांति की शुरुआत कहां हुई थी?

चीन देश में 1960 के दशक में सबसे पहले नील क्रांति की शुरुआत हुई थी।

नील क्रांति का संबंध किससे है?

नील क्रांति का संबंध जलीय कृषि और मत्स्य पालन से है।

नील क्रांति का मुख्य उद्देश्य क्या है?

नील क्रांति का मुख्य उद्देश्य मछली पालन में वृद्धि और मछुआरों और मछली किसानों की आर्थिक समृद्धि का विकास है।

नीली क्रांति की शुरुआत किस पंचवर्षीय योजनाओं की गई थी?

वर्ष 1985 से 1990 सातवीं पंचवर्षीय योजना में नील क्रांति की शुरुआत भारत में की गई थी।

Rashvinder
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मैं Rashvinder Narwal टेक्निकल फील्ड में एक्सपर्ट हूं और कंटेंट राइटिंग के साथ-साथ SEO में भी एक्सपर्टीज रखता हूं। मैं हमेशा जनरल नॉलेज और ज्ञानवर्धक टॉपिक्स के साथ ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर भी रिसर्च करता रहता हूं और उससे संबंधित लेख इस वेबसाइट पर पब्लिश करता हूं। मेरा मकसद हिंदी डाटा वेबसाइट पर सही जानकारी को लोगों तक पहुंचाना है।
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