बुधवार, मार्च 22, 2023

लोकतंत्र क्या है, लोकतंत्र की परिभाषा, संक्षिप्त जानकारी।

- Advertisement -
- Advertisement -
- Advertisement -

लोकतंत्र वह system है, जिसे हमारा भारत देश और विश्व के ज्यादातर अन्य देश follow करते हैं। यह राजतंत्र से बिल्कुल opposite होता है। इन दोनों के बीच में अंतर समझने के लिए आपको यह समझना होगा कि ‘loktantra kya hai‘ और ‘Loktantra ki Visheshtayen‘ क्या है।

लोकतंत्र क्या है? – Loktantra kya hai ?

Loktantra ki paribhasha करना बहुत बड़ा और जटिल कार्य है। लोक तंत्र को परिभाषित करना चाहें तो हम कह सकते हैं की ऐसी शासन व्यवस्था जिसमें जनता का शासन होता है और जनता ही शक्तिशाली होती है। Loktantra या प्रजातंत्र की एक निश्चित परिभाषा देना एक कठिन कार्य है, क्योंकि अलग–अलग कालों के विचारकों द्वारा Loktantra की अलग–अलग परिभाषा दी है।

Loktantra में शासन किसी एक व्यक्ति विशेष या समुदाय विशेष के पास न रहकर जनता के पास रहता है, क्योंकि जनता अपनी इच्छा से मत देकर शासन करने वाले दल को चुनती है। इसलिए हम कह सकते हैं की शासन का जनता का होता है। क्योंकि शासन किसके पास होगा यह तय करना जनता के हाथ में है। क्योंकि आवधिक निर्वाचन में जनता अपने मताधिकार का उपयोग करके शासन करने वाले दल को बदल सकती है।

लोकतंत्र का अर्थ क्या है? – Definition of democracy in Hindi

दुनिया के कुछ महान व्यक्तियों ने अपने अलग-अलग शब्दों में बताया है कि loktantra kya hai. उदाहरण के लिए दुनिया की सबसे पुरानी डेमोक्रेसी अमेरिका के पहले राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने अपने शब्दों में loktantra ki paribhasha दी है।

लोकतंत्र की परिभाषा

लोकतंत्र की परिभाषा: लोकतंत्र बना है दो शब्दों के मेल से (लोक+तंत्र), लोक का अर्थ है जनता और तंत्र का अर्थ है शासन लोकतंत्र को हम प्रजातंत्र भी कह सकते हैं जिसका अर्थ है लोगों का शासन या फिर जनता का शासन। लोकतंत्र से अभिप्राय ऐसे शासन व्यवस्था से है जिसमें शासन जनका के लिए, जनता के द्वारा, जनता का शासन होता है। Loktantra में ऐसी व्यवस्था होती है जिसमें सभी व्यक्ति एक सामान होते हैं और सबके सामान अधिकार होते हैं।

Abraham Lincoln head on shoulders photo portrait
अब्राहम लिंकन की फ़ोटो

अब्राहम लिंकन के शब्दों में loktantra ki paribhasha: “लोकतंत्र जनता के लिए, जनता के द्वारा, जनता का शासन है। लोकतंत्र में जनता अपनी इच्छा से सरकार का चयन कर सकती है। लोक-तंत्र में सामान सभी व्यक्तियों को सामान अधिकार होते हैं। एक अच्छे लोक-तंत्र की पहचान यह है की उसमे सामाजिक और राजनीतिक के साथ साथ आर्थिक न्याय की व्यवस्था भी हो। यह शासन व्यवस्था देश लोगों को राजनीतिक, धार्मिक और राजनीतिक स्वतन्त्र प्रदान करती है।

लोकतंत्र का इतिहास बहुत पुराना है। बहुत पुरानी सभ्यताओं में भी कही न कही लोकतांत्रिक संस्थाएँ थी। धीरे धीरे हम दृष्टिकोण व्यापक होता गया और हम समाज निर्माण की इच्छा से हम Loktantra की व्यवस्था की तरफ अग्रसर हुए हैं। क्योंकि ये ही एक ऐसी शासन प्रणाली या व्यवस्था है जिसमें लोगों के अधिकार सामान और सुरक्षित रहेंगे और लोगों की शासन व्यवस्था में अधिकतम भागीदारी होगी।

लोकतंत्र की विशेषताएँ – Loktantra ki Visheshtayen

  • बहुत लोगों का शासन
  • सब व्यक्तियों के सामान अधिकार
  • सामाजिक,राजनितिक और आर्थिक न्याय की व्यवस्था
  • श्रेष्ठ नागरिक समाज निर्माण करना
  • संवैधानिक सरकार
  • बहुमत से निर्णय
  • सरकार का जनता के प्रति उत्तरदायी होना
  • विधि द्वारा शासन
  • जनता के अधिकारों व हितों की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य
  • वयस्क मताधिकार
  • सरकार के निर्णय में जनता का हिस्सा

भारत में लोकतंत्र

भारत में पूर्णतया लोकतंत्रात्मक व्यवस्था उपस्थित है। भारत में लोक-तंत्र की सब विशेषताओं को देखा जा सकता है, जैसे- बहुमत से निर्णय, संवैधानिक सरकार, आवधिक निर्वाचन, जनता के अधिकारों की रक्षा सरकार का कर्त्तव्य है, विधि द्वारा शासन, वयस्क मताधिकार आदि। भारत को विश्व में एक लोकतान्त्रिक देश के रूप में जाना जाता है जिसका सबसे बड़ा व लिखित संविधान है।

भारत में लोकतान्त्रिक व्यवस्था को सुचारू ढंग से चलने के लिए संविधान बनाया गया जिससे की विधि से शासन को पूर्णतया लागू किया जा सके। भारतीय संविधान में वर्णित विधियों द्वारा Loktantra की रक्षा को सुनिश्चित किया गया है। भारत में व्यक्तियों को मौलिक अधिकार दिए गए हैं, राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत हैं जो व्यक्तियों के हितों की रक्षा करते हैं, व्यक्तियों की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित किया गया है, व्यक्तियों के हितों को सर्वोपरि रखा गया है, सरकार के निर्णयों में जनता की सहभागिता देखी जा सकती है।

ज़रूर पढ़ें: मौलिक अधिकार – इतिहास, विशेषताएँ, सम्पूर्ण जानकारी।

Indian Parliament, Loktantra kya hai

लोकतंत्रात्मक व्यवस्था का राष्ट्र पर प्रभाव

किसी भी राष्ट्र पर वहां के लोगों का और वह रहने वाले लोगों पर शासन करने वाली शासन व्यवस्था का बहुत प्रभाव पड़ता है। शासन व्यवस्था कैसी हो उसी से उस राष्ट्र के लोगों के जीवन यापन को समझा जा सकता है। शासन व्यवस्था का किस राष्ट्र पर प्रभाव दर्शाने के लिए हम लोकतंत्रात्मक व्यवस्था और तानाशाही में क्या अंतर है उसे समझेंगे।

  • लोकतंत्र लोगों को बोलने की आज़ादी देता है, तानाशाही में लोगों को सरकार के खिलाफ बोलने की आज़ादी नहीं है।
  • लोकतन्त्र में किसी विशेष व्यक्ति या वर्ग का शासन नहीं हो सकता, जबकि तानाशाही में किसी व्यक्ति विशेष या वर्ग का शासन होता है।
  • लोकतंत्र में जनता सरकार के निर्णय को प्रभावित करती है, तानाशाही में सरकार के निर्णय में जनता की सहभागिता शासक पर निर्भर करती है।
  • लोकतन्त्र में सरकार के प्रत्येक निर्णय में जनता के हितों को सर्वोपरि रखा जाता है, तानाशाही में प्रत्येक निर्णय शासक की इच्छा पर निर्भर है, वो जनता के हित में भी हो सकता है और अहित में भी हो सकता है।
  • लोकतंत्र में हर निर्णय बहुमत से जनता के अधिकारों और हितों को ध्यान में रख कर लिया जाता है, जबकि तानाशाही में शासक चाहे तो अपने मन मर्जी का कोई भी निर्णय जनता पर थोप सकता है।

उपरोक्त लिखे शासन व्यवस्था के अंतर को देखकर हम जन सकते हैं की किस शासन व्यवस्था वाले देश में लोगों की स्थिति क्या हो सकती है। इतिहास में जा कर देखे तो आप पायेंगे की तानाशाही वाली शासन व्यवस्था में लोगों की  स्थिति बहुत दयनीय रही है जबकि लोकतंत्रात्मक व्यवस्था में लोगों की स्थिति बहुत सुखमय रही है।

लोकतंत्र के प्रकार

लोकतंत्र क्या है यह जानने के बाद यह जानना भी ज़रूरी है की लोकतन्त्र के कितने रूप हैं या किस किस प्रकार से लोकतन्त्र व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाया जा सकता है। लोकतंत्र के मुख्यतया दो रूप हैं:

  1. प्रत्यक्ष लोकतंत्र या प्रजातंत्र
  2. अप्रत्यक्ष लोकतंत्र या प्रजातंत्र

प्रत्यक्ष लोकतंत्र एक ऐसी व्यवस्था है जो की बहुत समय पहले अपनाई जाती थी। इस व्यवस्था में लोग इकट्ठे होकर अपने लिए अपने आप ही कानून बनाते थे और उसे लागू करते थे। यह व्यवस्था उन्हीं जगहों पर हो सकती है जहाँ पर जनसंख्या बहुत कम हो। आज के समय में प्रत्यक्ष लोकतन्त्र कहीं पर भी देखने को नहीं मिलता है, क्योंकि आज के समय छोटे से छोटे देश की जनसंख्या लाखों में है। इसलिए प्रत्यक्ष लोकतन्त्र आज के समय कहीं पे भी संभव नहीं है।

अप्रत्यक्ष लोकतंत्र एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें लोग चुनाव द्वारा अपना प्रतिनिधि चुनते हैं और प्रतिनिधि फिर लोगों के लिए कानून बनता है और उसे लागू करता है। असल में अप्रत्यक्ष लोकतंत्र ही शुद्ध लोकतंत्र कहा जा सकता है। क्योंकि आज के समय जनसंख्या ज्यादा होने की वजह से प्रत्यक्ष लोक-तंत्र तो संभव है ही नही।

उपरोक्त वर्णित रूपों के आलावा भी लोकतंत्र के और प्रकार हो सकते हैं जैसे-

Loktantra व्यवस्था के गुण

लोक-तंत्र की परिभाषा, अर्थ, विशेषताओं के अध्ययन के बाद हम ये बात आराम से कह सकते हैं की लोकतंत्रात्मक व्यवस्था के में बहुत अधिक गुण निहित हैं जो किसी राष्ट्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

किसी भी राष्ट्र के विकास में वह की शासन व्यवस्था का बहुत बड़ा हाथ होता है, इसलिए उस शासन व्यवस्था में राष्ट्र के समाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक व मानवीय गुणों का होना अत्यंत आवश्यक है।

लोकतंत्रात्मक व्यवस्था में वो सब गुण मौजूद हैं जो किसी राष्ट्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था के गुण निम्नलिखित हैं:

  • लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था सार्वजनिक शिक्षण पर जोर देती है
  • लोकतान्त्रिक व्यवस्था का आधार उच्च आदर्श हैं
  • यह शासन व्यवस्था जन कल्याण को सर्वोपरि मानती है
  • यह शासन व्यवस्था देश में भ्रातृत्व और देश प्रेम की भावना पर जोर देती है
  • लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था परिवर्तनशील है

लोकतंत्र की सीमाएँ क्या हैं?

Loktantra में बहुत से ऐसे गुण हैं जो किसी राष्ट्र के विकास के लिए आवश्यक हैं, लेकिन उसके साथ साथ इसकी सीमाएँ भी हैं। जिन पर प्रकाश डालना भी आवश्यक है जैसे- चुना हुआ प्रतिनिधि जनता अपने हित को देखकर चुनती है, और प्रत्येक व्यक्ति के हित सामान हों ये आवश्यक नहीं, इसमें कोई भी व्यक्ति कोई निर्णय स्वतन्त्र रूप से लेना चाहे तो नहीं ले सकता, जनता जब चाहे सरकार का तख्ता पलट कर सकती है और सरकार अपने हर निर्णय चाहे वो सफल हो या असफल जनता के लिए उत्तरदायी रहेगी।

निष्कर्ष

Loktantra सब शासन व्यवस्थाओं से बेहतर व्यवस्था है, जिसे देश में भी लोक-तंत्र है अधिकतर यही देख गया है की उस देश का विकास हुआ है और वहां की लोगों का जीवन खुशहाल व्यतीत होता है। इसके कुछ दोष, कमियाँ या सीमाएँ हैं परन्तु लोक-तंत्र के गुणों को देखते हुए उन कमियों को नजरंदाज किया जा सकता है।


लोकतंत्र क्या है? loktantra kya hai ?

किसी भी देश या प्रांत का शासन किसी व्यक्ति विशेष के पास ना होकर जनता के पास हो, उसे लोकतंत्र कहा जाता है। किसी भी देश में लोग वोट के द्वारा अपने प्रतिनिधि को चुनते हैं। भारत देश इसका एक अच्छा उदाहरण है।

लोकतंत्र की विशेषताएँ क्या है? Loktantra ki visheshtaen

लोकतंत्र की विशेषताएँ: बहुत लोगों का शासन, सब व्यक्तियों के सामान अधिकार, सामाजिक,राजनितिक और आर्थिक न्याय की व्यवस्था, श्रेष्ठ नागरिक समाज निर्माण करना, संवैधानिक सरकार, बहुमत से निर्णय, सरकार का जनता के प्रति उत्तरदायी होना, विधि द्वारा शासन, जनता के अधिकारों व हितों की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य, वयस्क मताधिकार, सरकार के निर्णय में जनता का हिस्सा।

भारत में किस प्रकार का लोकतंत्र है? Bharat mein kis prakar ka loktantra hai ?

भारत में अप्रत्यक्ष लोकतंत्र है। इसमें लोग अपने प्रतिनिधि चुनते हैं, प्रतिनिधि लोगों के लिए क़ानून बनाते हैं और लागू भी करते हैं।

लोकतंत्र को इंग्लिश में क्या कहते हैं? Loktantra ko english mein kya kahate hain ?

लोकतंत्र को इंग्लिश में डेमोक्रेसी ( Democracy ) कहते हैं।

‘Democracy’ शब्द किस भाषा से लिया गया है? Democracy shabd kis bhasha se liya gaya hai ?

Democracy शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा से हुई है। यह दो शब्दों से मिलकर बनी है: ‘डेमो’ (Demos) का अर्थ है एक विशेष शहर-राज्य के भीतर रहने वाले सभी नागरिक और ‘क्रेटोस’ (kratos) का अर्थ शक्ति या शासन है।

Democracy in Hindi ?

Democracy को हिंदी में लोकतंत्र कहते हैं।

डेमोक्रेसी का क्या अर्थ है ?

डेमोक्रेसी में लोग अपने प्रतिनिधि को चुनते हैं, और अपने देश में इलेक्टेड सरकार की स्थापना करते हैं। डेमोक्रेसी में किसी भी व्यक्ति विशेष के पास ताक़त न होकर लोगों के पास ही ताक़त होती है।

सम्बंधित जानकारी

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

- Advertisement -spot_img

ज़रूर पढ़ें

नवीनतम